Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua

Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua

Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua

Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua,”The person who does not run the shop and the profit is less. Despite many attempts, the shop is not selling. The shop is also in a good location. There is no barkat in the shop. There is always loss, in such a situation(you are reading – Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua), that person or the owner of the shop needs a talisman and dua. And he has to hang it at the leading door of the shop. Tawiz Dua and Amal are given below. Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua.

Things to remember before making a Taweez/Tabiz :

  1. First take a paper and pen or pencil.
  2. Remember paper, pen and pencil are clean.
  3. When the taweez is made, put it in a silver frame and read the dua and hang it in the shop.
  4. Significantly: Do not make these taweezs during the 7 days of haze / menstruation.
  5. Ghar Ki Hifajat Ke Liye TAweez Or Dua. Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua.



Dukan Ki Barkat Ke Liye Taweez 1:

  1. Write this map to Jumma, Hafta, Pir or Mars before the sun rises.
  2. The sun will watch before the sun rises.
  3. The moon will be clocked before the sun rises in the week.
  4. Pir must watch Atarud before the sun rises.
  5. Mishtari’s watch is the best before the sun goes out on Mars.
  6. Then the writer has the right to write whatever the day.
  7. After writing, stick it on a cardboard and hang that cardboard in the shop.
  8. If Allah wished, there would be a lot of sales.

Amal Taweez For shop 2 :

  • First of all, four Kori Sakori in which Kheer or Phini are collected on the occasion of happiness.
  • But those are the ones who have no water.
  • On that day, write a Jumrat Jumma or Pir on the day of Mishtari.
  • Then hang them in all corners of the shop.
  • If Allah wished, there would be a lot of sales and more profit.
  • This watch comes to the Jumrat as soon as the sun comes out and in the fifth hour after the sun comes out.
  • Pir arrives in the third hour after the sun rises.
  • It is very important for the writer to take care of these times. Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua



Do not perform any amal without permission.

दुकान की तरक्की के लिए ताबीज और अमल हिंदी में :

जिस व्यक्ति की दुकान न चलती हो और लाभ कम होता हो। बहुत कोशिशों के बाद भी दुकान में बिक्री नहीं हो रही। दुकान भी अच्छी जगह पर है। दुकान में बरकत नहीं है। हमेशा नुकसान होता है तो ऐसी स्थिति में उस इंसान या दुकान के मालिक को एक तावीज़ और दुआ की जरुरत है। और उसे दुकान के प्रमुख दरवाजे पर लटका देना है। तावीज़ दुआ और अमल निचे दिए गए हैं। Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua.

तावीज़ बनाने से पहले याद रखने योग्य बातें :

  1. सबसे पहले एक कागज और पेन या पेंसिल ले लें।
  2. याद रहे कागज, पेन और पेंसिल पाक साफ़ हों।
  3. जब तावीज़ बन जाये तो उसे एक चांदी के फ्रेम में डाले और दुआ पढ़ कर दुकान में लटका दें।
  4. गौरतलब : धुंध / मासिक धर्म के 7 दिनों के दौरान इन तावीज़ों को न बनाएं। Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua.

दुकान की बरकत के लिए तावीज़ 1 :

  • इस नक्श को सूरज निकलने से पहले जुम्मा, हफ्ता, पीर या मंगल को लिखें।
  • जुम्मे को सूरज निकलने से पहले सूरज की घडी होगी।
  • हफ्ते को सूरज निकलने से पहले चाँद की घडी होगी।
  • पीर को सूरज निकलने से पहले अतारुद की घडी होगी।
  • मंगल को सूरज निकलने से पहले मिशतरी की घडी सबसे बेहतर है।
  • फिर आगे लिखने वाले को अधिकार है की चाहे जिस दिन लिखें।
  • लिखने के बाद एक गत्ते पर चिपका कर उस गत्ते को दुकान में लटका दें।
  • अल्लाह ने चाहा तो खूब बिक्री होगी। Pari Ka Amal



अमल दुकान के लिए २:

  • बसे पहले चार कोरी सकोरी जिनमें ख़ुशी के अवसर पर खीर या फ़िनी जमाते हैं।
  • लेकिन वह ऐसी हों कि जिनको पानी न लगा हो।
  • उसको लेकर उनपर जुमरात जुम्मा या पीर के दिन मिशतरी की घडी में लिखे।
  • फिर दुकान के चारो कोनों में उनको लटका कर रखे।
  • अल्लाह ने चाहा तो खूब बिक्री होगी और अधिक लाभ होगा।
  • जुमरात को यह घडी सूरज निकलते ही आती है और जुमे को पांचवे घंटे में सूरज निकलने के बाद से आती है।
  • पीर को सूरज निकलने के बाद तीसरे घंटे में आती है।
  • लिखने वाले को इन समयों का ख्याल रखना बड़ा जरुरी है। Dukan Ki Tarakki Ke Liye Taweez Or Dua.

कोई भी अमल बिना इजाजत के न करे।

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